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लक्ष्य एवं उद्देश्य :-

निगम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के सदस्यों को आर्थिक तथा समाजिक विकास हेतु रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना तथा आर्थिक रुप से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। यह निगम, अनुसूचित जाति के परिवारों के आय वृद्वि कार्यक्रम में उत्प्रेरक की भूमिका अदा करता है।

निगम के अन्य उद्देश्य निम्नवत हैं :-

  1. कृषि, उत्पादन, मार्केटिंग, कृषि उत्पादों का संवर्धन -संरक्षण-वितरण-भण्डारण, लघु उद्योग, लघु व्यवसाय या अन्य ऐसे कार्यक्रम, जिससे अनुसूचित जाति के सदस्यों का जीवन स्तर अच्छा हो, उसकी योजनाएँ बनाना, प्रोत्साहित एवं सहयोग करना।
  2. जिला स्तरीय अनुसूचित जाति सहयोग समितियाँ तथा औद्यौगिक सहयोग समितियाँ जो अनुसूचित जाति के सदस्यों के विकास के लिए है, उनके संगठन, पर्यवेक्षण, सहयोग तथा तकनीकी सहायता देना।
  3. औद्यौगिक सहयोग समितियाँ द्वारा किये जाने वाले अनुबंधों और उसके अन्य लेनदेन को नियमानुसार बढ़ावा देना, ताकि धीरे धीरे मध्यस्थों की भूमिका खत्म हो और अनुसूचित जाति के कारीगरो को बेहतर पारिश्रमिक और लाभ में हिस्सा मिल सके।
  4. ऋण आदि की व्यवस्था करना तथा जमा स्वीकार करना।
  5. सम्बद्व समितियों को ऋण और मार्जिन मनी की सुविधा उपलब्ध कराना।
  6. सहकारी संस्थाओं में अंश लेना।
  7. सहकारी संगठनों के सदस्यों को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृति एवं शोध के लिए अवार्ड देना।
  8. अनुसूचित जाति के विकास के लिए गृह/छात्रावास आवासीय विद्यालय के निर्माण का कार्य लेना।
  9. खाद्यान्न तथा कृषि उत्पादों की खरीद, वितरण, आपूर्ति आवश्यकतानुसार करने के लिए सरकार की एजेंसी के रुप में कार्य करना।
  10. सम्बद्व समितियों के कार्यकलापों का कोर्डिनेशन, पर्वेक्षण   तथा नियंत्रण करना।
  11. लघु, कुटीर एवं ग्रामीण विकास के सर्वेक्षण, शोध एवं समस्याओं तथा उनके विकास के लिए सुविधाएँ जुटाना ताकि अनुसूचित जाति के सदस्यों को बेहतर रोजगार मिल सके।
  12. ग्रामीण उद्योगों के तैयार माल की मार्केटिंग एवं बिक्री के लिए सुविधाएँ जुटाना, आवश्यकतानुसार शोरुम/इम्पोरियम आदि खोलना।
  13. निगम के पास उपलब्ध फण्ड को निवेश या जमा सरकारी सिक्युरिटिज, सहकारिता बैंक या अन्य बैंक में निगम  पर्षद के निर्णयानुसार करना।
  14. निगम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संसाधन जुटाने हेतु बॉन्ड और डिबेन्चर निर्गत करना।
 
 
   

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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